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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 5 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 5 • ऋचा / मन्त्र 10

1.5.10

Mantra ID: 1.5.10

मा नो॒ मर्ता॑ अ॒भि द्रु॑हन्त॒नूना॑मिन्द्र गिर्वणः । ईशा॑नो यवया व॒धम् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.5.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तुति करने के योग्य इंद्र! तुम शक्तिशाली हो. तुम ऐसी कृपा करना कि हमारे शन्रु हमारे शरीर पर चोट न कर सकें. तुम उन्हें हमारा वध करने से रोकना. (१०)

EN English Translation

O Indra worthy of praise! You're powerful. Please be so kind that our enemies cannot hurt our bodies. You stop them from slaughtering us. (10)

卐 HinduText AI