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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 5 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 5 • ऋचा / मन्त्र 6

1.5.6

Mantra ID: 1.5.6

त्वं सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ स॒द्यो वृ॒द्धो अ॑जायथाः । इन्द्र॒ ज्यैष्ठ्या॑य सुक्रतो ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.5.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सुंदर कर्म करने वाले इंद्र! तुम सभी देवों में बड़े होने के कारण सोमपान करने के लिए सबसे अधिक उत्साहित रहते हो. (६)

EN English Translation

O Indra who does beautiful deeds! You remain the most excited to sompan because you are most grow up among all the gods. (6)

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