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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 97 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 7

1.97.7

Mantra ID: 1.97.7

द्विषो॑ नो विश्वतोमु॒खाति॑ ना॒वेव॑ पारय । अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.97.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सर्वतोमुख अग्नि! जिस प्रकार नाव से नदी को पार करते हैं, उसी प्रकार तुम हमारे कल्याण के लिए हमें शत्रुरहित देश में पहुंचाओ. हमारे पाप नष्ट हों. (७)

EN English Translation

This is the agni! Just as you cross the river by boat, so you take us to a land without enemies for our welfare. Let our sins be destroyed. (7)

卐 HinduText AI