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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 104 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 104 • ऋचा / मन्त्र 9

10.104.9

Mantra ID: 10.104.9

अ॒पो म॒हीर॒भिश॑स्तेरमु॒ञ्चोऽजा॑गरा॒स्वधि॑ दे॒व एकः॑ । इन्द्र॒ यास्त्वं वृ॑त्र॒तूर्ये॑ च॒कर्थ॒ ताभि॑र्वि॒श्वायु॑स्त॒न्वं॑ पुपुष्याः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.104.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने वृत्र के पास से बहुत जल गिराया. इन मुक्त जलों के प्रति एकमात्र तुम्हीं सावधान थे. तुमने वृत्र को मारकर प्राप्त किए गए जलों से सारे संसार के प्राणियों का शरीर पुष्ट किया था. (९)

EN English Translation

O Indra! You dropped a lot of water from the vritra. You were the only one who was wary of these free waters. You had confirmed the body of the creatures of the whole world with the waters obtained by killing the vritra. (9)

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