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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 137 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 137 • ऋचा / मन्त्र 2

10.137.2

Mantra ID: 10.137.2

द्वावि॒मौ वातौ॑ वात॒ आ सिन्धो॒रा प॑रा॒वतः॑ । दक्षं॑ ते अ॒न्य आ वा॑तु॒ परा॒न्यो वा॑तु॒ यद्रपः॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.137.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दो प्रकार की वायु समुद्र तक एवं उससे भी आगे बहती हैं. हे स्तोता! एक वायु तुम्हें शक्ति दे और दूसरी तुम्हारा पाप नष्ट करे. (२)

EN English Translation

Two types of air flow to and beyond the sea. This is the hymn! One air gives you strength and the other destroys your sin. (2)

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