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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 144 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 144 • ऋचा / मन्त्र 1

10.144.1

Mantra ID: 10.144.1

अ॒यं हि ते॒ अम॑र्त्य॒ इन्दु॒रत्यो॒ न पत्य॑ते । दक्षो॑ वि॒श्वायु॑र्वे॒धसे॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.144.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सृष्टिकर्ता इंद्र! यह अमृत तुल्य सोमरस तुम्हें घोड़े के समान दीड़ाता है. यह बल का आधार एवं सबका जीवन है. (१)

EN English Translation

O Creator Indra! This nectar-like somras makes you look like a horse. It is the basis of force and the life of all. (1)

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