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10.144.1
अ॒यं हि ते॒ अम॑र्त्य॒ इन्दु॒रत्यो॒ न पत्य॑ते । दक्षो॑ वि॒श्वायु॑र्वे॒धसे॑ ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.144.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सृष्टिकर्ता इंद्र! यह अमृत तुल्य सोमरस तुम्हें घोड़े के समान दीड़ाता है. यह बल का आधार एवं सबका जीवन है. (१)
EN English Translation
O Creator Indra! This nectar-like somras makes you look like a horse. It is the basis of force and the life of all. (1)