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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 144 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 144 • ऋचा / मन्त्र 2

10.144.2

Mantra ID: 10.144.2

अ॒यम॒स्मासु॒ काव्य॑ ऋ॒भुर्वज्रो॒ दास्व॑ते । अ॒यं बि॑भर्त्यू॒र्ध्वकृ॑शनं॒ मद॑मृ॒भुर्न कृत्व्यं॒ मद॑म् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.144.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दाता इंद्र का दीप्त वज्र हम लोगों में प्रशंसनीय है. इंद्र ऊर्ध्वकृशन नामक स्तोता तथा यज्ञकर्ता का पालन ऋभु नामक देव के समान करते हैं. (२)

EN English Translation

The bright thunderbolt of the giver Indra is admirable among us. Indra follows the hymn named Uardhwakrishan and the yajnakar as a god named Ribhu. (2)

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