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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 17 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 1

10.17.1

Mantra ID: 10.17.1

त्वष्टा॑ दुहि॒त्रे व॑ह॒तुं कृ॑णो॒तीती॒दं विश्वं॒ भुव॑नं॒ समे॑ति । य॒मस्य॑ मा॒ता प॑र्यु॒ह्यमा॑ना म॒हो जा॒या विव॑स्वतो ननाश ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.17.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

त्वष्टा अपनी कन्या सरण्यू का विवाह करने वाले हैं. विवाह की तैयारी में सारा संसार सम्मिलित है. यम और यमी की माता का जब सूर्य से विवाह हुआ, तब सूर्य की पत्नी उत्तर कुरु देश से चली गई. (१)

EN English Translation

Tvashta is about to marry his daughter Saranu. The whole world is involved in the preparation of marriage. When Yama and Yami's mother got married to Surya, Surya's wife left the north Kuru country. (1)

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