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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 26 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 26 • ऋचा / मन्त्र 2

10.26.2

Mantra ID: 10.26.2

यस्य॒ त्यन्म॑हि॒त्वं वा॒ताप्य॑म॒यं जनः॑ । विप्र॒ आ वं॑सद्धी॒तिभि॒श्चिके॑त सुष्टुती॒नाम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.26.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह मेधावी यजमान सूर्यमंडल में स्थित महान्‌ जलसमूह को यज्ञक्रिया द्वारा धरती पर लावें. पूषादेव यजमान की शोभन स्तुतियां जानें. (२)

EN English Translation

This brilliant host should bring the great water group located in the sun system to the earth through yajna kriya. Know the praises of the Lord's host. (2)

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