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10.30.1
प्र दे॑व॒त्रा ब्रह्म॑णे गा॒तुरे॑त्व॒पो अच्छा॒ मन॑सो॒ न प्रयु॑क्ति । म॒हीं मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य धा॒सिं पृ॑थु॒ज्रय॑से रीरधा सुवृ॒क्तिम् ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.30.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
यज्ञ के समय सोमरस देवों के निमित्त उस प्रकार शीघ्र जल की ओर जावें, जिस प्रकार मन तेज चलता है. हे अध्वर्युजनो! मित्र एवं विस्तृत गति इंद्र के लिए महान् सोम को शुद्ध करो. (१)
EN English Translation
At the time of yajna, the Somras should go to the water for the sake of the gods as soon as the mind moves fast. O adhwaryujano! Purify the great mon for friend and wide speed Indra. (1)