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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 30 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 2

10.30.2

Mantra ID: 10.30.2

अध्व॑र्यवो ह॒विष्म॑न्तो॒ हि भू॒ताच्छा॒प इ॑तोश॒तीरु॑शन्तः । अव॒ याश्चष्टे॑ अरु॒णः सु॑प॒र्णस्तमास्य॑ध्वमू॒र्मिम॒द्या सु॑हस्ताः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.30.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे हव्य धारण करने वाले अध्वर्युजनो! तुम सोम से युक्त हो जाओ. सोमरस निचोड़ने की अभिलाषा करने वाले तुम सोमरस की कामना करने वाले जलों की ओर जाओ. हे सुंदर हाथों वाले अध्वर्युजनो! यह सोम लाल रंग के पक्षी की तरह नीचे गिरता है, उसे तरंग के रूप में दशापवित्र पर डालो. (२)

EN English Translation

Those who hold this havya, the adhwaryujano! You get consisted of mon. Those who wish to squeeze the somras go to the waters that wish for somras. O you have beautiful hands! It falls down like a bird of mon red, pour it on the dashapavittra as the waveform. (2)

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