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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 40 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 40 • ऋचा / मन्त्र 8

10.40.8

Mantra ID: 10.40.8

यु॒वं ह॑ कृ॒शं यु॒वम॑श्विना श॒युं यु॒वं वि॒धन्तं॑ वि॒धवा॑मुरुष्यथः । यु॒वं स॒निभ्यः॑ स्त॒नय॑न्तमश्वि॒नाप॑ व्र॒जमू॑र्णुथः स॒प्तास्य॑म् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.40.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुमने कृश, शंयु, अपने सेवकों ओर विधवा वध्रिमती का उद्धार किया था. तुम ही अपने यजमानों के लिए गरजते हुए तथा गतिशील द्वार वाले मेघ को भेदकर जल बरसाते हो. (८)

EN English Translation

O Ashchini Kumaro! You saved Krish, Shaunyu, your servants and the widowed bride. You are the one who showers water for your hosts by penetrating the cloud with thundering and moving doors. (8)

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