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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 40 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 40 • ऋचा / मन्त्र 9

10.40.9

Mantra ID: 10.40.9

जनि॑ष्ट॒ योषा॑ प॒तय॑त्कनीन॒को वि चारु॑हन्वी॒रुधो॑ दं॒सना॒ अनु॑ । आस्मै॑ रीयन्ते निव॒नेव॒ सिन्ध॑वो॒ऽस्मा अह्ने॑ भवति॒ तत्प॑तित्व॒नम् ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.40.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारी कृपा से मैं युवती बन गई हूं और मेरी कामना करने वाला पति आ गया है. तुम्हारे द्वारा की गई वर्षा के बाद पेड़पौधे उग आए हैं. जिस प्रकार नीचे बहने वाली नदियां सागर की ओर जाती हैं, उसी प्रकार पौधे इन की ओर बढ़ रहे हैं. इस पति को ऐसा यौवन प्राप्त हो, जिसे कोई नष्ट न कर सके. (९)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! By your grace I have become a young woman and the husband who wished me has come. After the rain you have done, the trees have grown up. Just as the rivers flowing down go towards the ocean, so the plants are moving towards them. May this husband attain a youth which no one can destroy. (9)

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