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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 46 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 9

10.46.9

Mantra ID: 10.46.9

द्यावा॒ यम॒ग्निं पृ॑थि॒वी जनि॑ष्टा॒माप॒स्त्वष्टा॒ भृग॑वो॒ यं सहो॑भिः । ई॒ळेन्यं॑ प्रथ॒मं मा॑त॒रिश्वा॑ दे॒वास्त॑तक्षु॒र्मन॑वे॒ यज॑त्रम् ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.46.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि को द्यावा-पृथिवी ने जन्म दिया है. जलों, त्वष्टा और भृगुओं ने तेजों द्वारा प्राप्त किया है. वायु तथा अन्य देवों ने अग्नि को मानवों के यज्ञ के लिए बनाया है. (९)

EN English Translation

Fire has been given birth by Dyava-Prithvivi. The waters, the skins and the bhrigus have been obtained by the lightnings. Vayu and other gods have made agni for the yagna of human beings. (9)

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