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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 54 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 3

10.54.3

Mantra ID: 10.54.3

क उ॒ नु ते॑ महि॒मनः॑ समस्या॒स्मत्पूर्व॒ ऋष॒योऽन्त॑मापुः । यन्मा॒तरं॑ च पि॒तरं॑ च सा॒कमज॑नयथास्त॒न्व१॒ः॑ स्वायाः॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.54.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! क्या हमसे पहले ऋषियों ने तुम्हारी संपूर्ण महिमा का पार पाया था? तुमने अपने माता-पितारूपी द्यावा-पृथिवी को अपने शरीर से उत्पन्न किया था. (३)

EN English Translation

O Indra! Did the sages before us surpass your full glory? You created your parents from your body. (3)

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