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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 54 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 4

10.54.4

Mantra ID: 10.54.4

च॒त्वारि॑ ते असु॒र्या॑णि॒ नामादा॑भ्यानि महि॒षस्य॑ सन्ति । त्वम॒ङ्ग तानि॒ विश्वा॑नि वित्से॒ येभिः॒ कर्मा॑णि मघवञ्च॒कर्थ॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.54.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पूज्य इंद्र! तुम्हारे चार असुरनाशक और अपराजेय शरीर हैं. हे धनस्वामी इंद्र! तुम इन सबको जानते हो, जिनके द्वारा वृत्रवधादि कर्म करते हो. (४)

EN English Translation

O godly Indra! You have four asuras and unbeatable bodies. O Dhanaswami Indra! You know all of them through whom you do the deeds. (4)

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