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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 11

10.61.11

Mantra ID: 10.61.11

म॒क्षू क॒नायाः॑ स॒ख्यं नवी॑यो॒ राधो॒ न रेत॑ ऋ॒तमित्तु॑रण्यन् । शुचि॒ यत्ते॒ रेक्ण॒ आय॑जन्त सब॒र्दुघा॑याः॒ पय॑ उ॒स्रिया॑याः ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.61.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने कमनीय गायों की मित्रता शीघ्र प्राप्त करके अमृततुल्य दूध देने वाली गाय का दूध यज्ञ में होम किया. उस समय नई संपत्ति के समान सिंचित करने वाला जल प्राप्त किया. (११)

EN English Translation

O Indra! The Angiragotrian sages quickly obtained the friendship of the commensurate cows and took home the milk of the cow which gave the nectar-like milk in the yajna. At that time the same irrigating water as the new property was obtained. (11)

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