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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 12

10.61.12

Mantra ID: 10.61.12

प॒श्वा यत्प॒श्चा वियु॑ता बु॒धन्तेति॑ ब्रवीति व॒क्तरी॒ ररा॑णः । वसो॑र्वसु॒त्वा का॒रवो॑ऽने॒हा विश्वं॑ विवेष्टि॒ द्रवि॑ण॒मुप॒ क्षु ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.61.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तोता इस प्रकार कहते हैं कि इंद्र अपने स्तोता से बहुत अधिक प्रेम करते हैं. स्तोता पणियों द्वारा चुराई गई अपनी गायों को जान पावें, उससे पहले ही वे गायों को खोजकर ले आते हैं. (१२)

EN English Translation

The stota thus says that Indra loves his stota very much. Before the stotas can know their cows stolen by the merchants, they find the cows and bring them. (12)

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