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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 63 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 17

10.63.17

Mantra ID: 10.63.17

ए॒वा प्ल॒तेः सू॒नुर॑वीवृधद्वो॒ विश्व॑ आदित्या अदिते मनी॒षी । ई॒शा॒नासो॒ नरो॒ अम॑र्त्ये॒नास्ता॑वि॒ जनो॑ दि॒व्यो गये॑न ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.63.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अदितिपुत्र देवो एवं अदिति! प्लुति के पुत्र विद्वान्‌ गय ऋषि ने तुम सब लोगों को बढ़ाया था. देवों की कृपा से मानवों को प्रभुता मिलती है. गय ऋषि ने देवसमूह की स्तुति की थी. (१७)

EN English Translation

O aditiputra devas and aditi! The learned sage Sage, the son of Pluty, had raised you all up. By the grace of the gods, human beings get dominion. Sage Gaya had praised the god group. (17)

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