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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 64 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 1

10.64.1

Mantra ID: 10.64.1

क॒था दे॒वानां॑ कत॒मस्य॒ याम॑नि सु॒मन्तु॒ नाम॑ श‍ृण्व॒तां म॑नामहे । को मृ॑ळाति कत॒मो नो॒ मय॑स्करत्कत॒म ऊ॒ती अ॒भ्या व॑वर्तति ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.64.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञ में किस स्तुतियोग्य देव की हम भली प्रकार स्तुति करें? कौन हमारी रक्षा करता है? कौन हमें सुख प्रदान करता है? हमारी रक्षा के लिए कौन हमारे पास आता है. (१)

EN English Translation

Which praiseworthy God should we praise well in the yajna? Who is protecting us? Who gives us happiness? Who comes to us to protect us? (1)

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