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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 67 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 11

10.67.11

Mantra ID: 10.67.11

स॒त्यामा॒शिषं॑ कृणुता वयो॒धै की॒रिं चि॒द्ध्यव॑थ॒ स्वेभि॒रेवैः॑ । प॒श्चा मृधो॒ अप॑ भवन्तु॒ विश्वा॒स्तद्रो॑दसी श‍ृणुतं विश्वमि॒न्वे ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.67.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देवो! मेरी अन्न संबंधी स्तुति को सच्चा बनाओ. अपने गमनों द्वारा मुझ स्तोता की रक्षा करो. मेरे शन्रु नष्ट हों. सबको प्रसन्न करने वाली द्यावा-पृथिवी मेरे वचन को सुनें. (११)

EN English Translation

Oh, God! Make my food praise true. Protect me by your moves to the hymn. My shanrus are destroyed. Listen to My word that pleases everyone. (11)

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