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10.85.17
सू॒र्यायै॑ दे॒वेभ्यो॑ मि॒त्राय॒ वरु॑णाय च । ये भू॒तस्य॒ प्रचे॑तस इ॒दं तेभ्यो॑ऽकरं॒ नमः॑ ॥ (१७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सूर्या, देवगण, मित्र, वरुण एवं प्राणियों को अभीष्ट फल देने वालों को मैं नमस्कार करता हूं. (१७)
EN English Translation
I salute surya, devagana, friends, varuna and those who give the desired fruits to beings. (17)