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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 13

10.86.13

Mantra ID: 10.86.13

वृषा॑कपायि॒ रेव॑ति॒ सुपु॑त्र॒ आदु॒ सुस्नु॑षे । घस॑त्त॒ इन्द्र॑ उ॒क्षणः॑ प्रि॒यं का॑चित्क॒रं ह॒विर्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

“हे वृषाकपि की पत्नी! तुम धनवाली, शोभनपुत्रयुक्त एवं शोभन पुत्रवधू हो. तुम्हारे बैल को इंद्र खा जावें एवं तुम्हारे सुखकर प्रिय हवि का भक्षण करें. इंद्र सबसे उत्तम हैं.” (१३)

EN English Translation

"O wife of Vrisakapi! You are dhanwali, shobhanputrayukta and shobhan daughter-in-law. Let your bull be eaten by Indra and eat your pleasantly beloved Havi. Indra is the best." (13)

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