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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 9

10.86.9

Mantra ID: 10.86.9

अ॒वीरा॑मिव॒ माम॒यं श॒रारु॑र॒भि म॑न्यते । उ॒ताहम॑स्मि वी॒रिणीन्द्र॑पत्नी म॒रुत्स॑खा॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्राणी ने कहा-“यह घातक वृषाकपि मुझे पतिहीना के समान समझता है. मैं इंद्रपत्नी वीर पुत्रों वाली एवं मरुतों की सखा हूं. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं.” (९)

EN English Translation

Indrani said, This deadly Vrashakapi thinks of me as a husband less. I am indra's spouse, the mother of brave sons and the friend of the maruts. Indra is the best. (9)

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