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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 86 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 8

10.86.8

Mantra ID: 10.86.8

किं सु॑बाहो स्वङ्गुरे॒ पृथु॑ष्टो॒ पृथु॑जाघने । किं शू॑रपत्नि न॒स्त्वम॒भ्य॑मीषि वृ॒षाक॑पिं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने कहा-_“हे सुंदर भुजाओं, शोभन उंगलियों, लंबे बालों व विस्तृत जंघाओं वाली एवं वीरपत्नी इंद्राणी! तुम वृषाकपि के प्रति व्यर्थ क्यों क्रोध कर रही हो? इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं.” (८)

EN English Translation

Indra said, "O beautiful arms, adorned fingers, long hair and wide thighs and a brave wife Indrani! Why are you being vainly angry with Vriskapi? Indra is the best." (8)

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