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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 87 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 87 • ऋचा / मन्त्र 10

10.87.10

Mantra ID: 10.87.10

नृ॒चक्षा॒ रक्षः॒ परि॑ पश्य वि॒क्षु तस्य॒ त्रीणि॒ प्रति॑ श‍ृणी॒ह्यग्रा॑ । तस्या॑ग्ने पृ॒ष्टीर्हर॑सा श‍ृणीहि त्रे॒धा मूलं॑ यातु॒धान॑स्य वृश्च ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.87.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मानवदर्शक अग्नि! तुम मानवहिंसक राक्षस को देखो तथा उसके तीन मस्तकों को काट डालो. (१०)

EN English Translation

O human agni! You look at the human violent monster and cut off its three heads. (10)

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