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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 87 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 87 • ऋचा / मन्त्र 9

10.87.9

Mantra ID: 10.87.9

ती॒क्ष्णेना॑ग्ने॒ चक्षु॑षा रक्ष य॒ज्ञं प्राञ्चं॒ वसु॑भ्यः॒ प्र ण॑य प्रचेतः । हिं॒स्रं रक्षां॑स्य॒भि शोशु॑चानं॒ मा त्वा॑ दभन्यातु॒धाना॑ नृचक्षः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.87.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम अपने तीखे तेज से हमारे यज्ञ की रक्षा करो. हे उत्तम ज्ञान वाले अग्नि! इस यज्ञ को धन के अनुकूल बनाओ. हे प्रदीप्त एवं मानवदर्शक अग्नि! तुम राक्षसों को मारो. वे तुम्हें न मार सकें. (९)

EN English Translation

O agni! You protect our yajna with your sharp sharpness. O agni of the best knowledge! Make this yajna friendly to money. O glorious and human-seeing agni! You kill the monsters. They can't kill you. (9)

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