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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 99 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 99 • ऋचा / मन्त्र 5

10.99.5

Mantra ID: 10.99.5

स रु॒द्रेभि॒रश॑स्तवार॒ ऋभ्वा॑ हि॒त्वी गय॑मा॒रेअ॑वद्य॒ आगा॑त् । व॒म्रस्य॑ मन्ये मिथु॒ना विव॑व्री॒ अन्न॑म॒भीत्या॑रोदयन्मुषा॒यन् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.99.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तोताओं के बिना मांगे ही धन देने वाले एवं महान्‌ इंद्र मरुतों के साथ अपना स्थान छोड़ कर आवें. मैं समझता हूं कि मुझ वम्र ऋषि के माता-पिता रोगरहित हो गए हैं. मैं शत्रुओं का धन छीनकर उन्हें रुलाता हूं. (५)

EN English Translation

Leave your place with the great Indra Maruts, who give money without asking for the psalms. I understand that my parents have become diseaseless. I take away the money of enemies and make them cry. (5)

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