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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 99 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 99 • ऋचा / मन्त्र 6

10.99.6

Mantra ID: 10.99.6

स इद्दासं॑ तुवी॒रवं॒ पति॒र्दन्ष॑ळ॒क्षं त्रि॑शी॒र्षाणं॑ दमन्यत् । अ॒स्य त्रि॒तो न्वोज॑सा वृधा॒नो वि॒पा व॑रा॒हमयो॑अग्रया हन् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.99.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्वामी इंद्र ने हल्ला मचाने वाले दासों का दमन किया था तथा तीन सिर वाले एवं छः आंखों वाले विश्वरूप को मारा था. त्रित ने इंद्र की शक्ति से बढ़कर लोहे के समान उंगलियों से वराह का नाश किया था. (६)

EN English Translation

Swami Indra had suppressed the slaves who made a hue and cry and killed the three-headed and six-eyed Vishwaroop. Trit had destroyed Varaha with iron-like fingers more than the power of Indra. (6)

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