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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 11 • Mantra / Rik 19

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 11 • ऋचा / मन्त्र 19

2.11.19

Mantra ID: 2.11.19

सने॑म॒ ये त॑ ऊ॒तिभि॒स्तर॑न्तो॒ विश्वाः॒ स्पृध॒ आर्ये॑ण॒ दस्यू॑न् । अ॒स्मभ्यं॒ तत्त्वा॒ष्ट्रं वि॒श्वरू॑प॒मर॑न्धयः सा॒ख्यस्य॑ त्रि॒ताय॑ ॥ (१९)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.11.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम उन लोगों की प्रशंसा करते हैं, जो तुम्हारे द्वारा सुरक्षित होकर सभी से उत्तम सिद्ध हुए एवं जिन्होंने आर्य बनकर दस्युजनों पर विजय पाई. जिस प्रकार तुमने त्रित का सखा बनकर त्वष्टा के पुत्र विश्वरूप का वध किया, वैसा ही कार्य हमारे लिए भी करो. (१९)

EN English Translation

We praise those who have been secured by you and proved superior to all, and who became Aryans and conquered the bandits. Just as you have killed Vishwaroop, the son of Taksha by becoming the friend of the Trinity, do the same for us. (19)

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