Popular:
ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 11 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 11 • ऋचा / मन्त्र 4

2.11.4

Mantra ID: 2.11.4

शु॒भ्रं नु ते॒ शुष्मं॑ व॒र्धय॑न्तः शु॒भ्रं वज्रं॑ बा॒ह्वोर्दधा॑नाः । शु॒भ्रस्त्वमि॑न्द्र वावृधा॒नो अ॒स्मे दासी॒र्विशः॒ सूर्ये॑ण सह्याः ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 2.11.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम स्तोत्र द्वारा तुम्हारा शोभन बल बढ़ाते हुए तुम्हारी भुजाओं में चमकता हुआ वज्र धारण करते हैं. स्तोत्रों द्वारा तेजयुक्त होकर तुम हमें हानि पहुंचाने वाले असुरों को सूर्यरूपी अस्त्र द्वारा हराते हो. (४)

EN English Translation

O Indra! We hold a shining thunderbolt in your arms, increasing your strength of adornment by the psalm. By being sharpened by hymns, you defeat the asuras who harm us with the sun-like weapon. (4)

卐 HinduText AI