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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 11 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 11 • ऋचा / मन्त्र 6

2.11.6

Mantra ID: 2.11.6

स्तवा॒ नु त॑ इन्द्र पू॒र्व्या म॒हान्यु॒त स्त॑वाम॒ नूत॑ना कृ॒तानि॑ । स्तवा॒ वज्रं॑ बा॒ह्वोरु॒शन्तं॒ स्तवा॒ हरी॒ सूर्य॑स्य के॒तू ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.11.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम तुम्हारे प्राचीन महान्‌ कर्मो की शीघ्र स्तुति करते हैं. हम तुम्हारे नूतन कार्यो की भी प्रशंसा करते हैं. तुम्हारी भुजाओं में वर्तमान वज्र की स्तुति करते हैं. तुम सूर्यरूप हो. तुम्हारे हरि नामक अश्च तुम्हारी पताका के समान हैं. हम उनकी भी स्तुति करते हैं. (६)

EN English Translation

O Indra! We praise your ancient great deeds quickly. We also admire your innovative work. Praise the present thunderbolt in your arms. You are the sun. Your ass called Hari are like your flag. We praise them too. (6)

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