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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 13 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 13 • ऋचा / मन्त्र 12

2.13.12

Mantra ID: 2.13.12

अर॑मयः॒ सर॑पस॒स्तरा॑य॒ कं तु॒र्वीत॑ये च व॒य्या॑य च स्रु॒तिम् । नी॒चा सन्त॒मुद॑नयः परा॒वृजं॒ प्रान्धं श्रो॒णं श्र॒वय॒न्सास्यु॒क्थ्यः॑ ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.13.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने बहने वाले जल के उस पार सरलता से पहुंचने के लिए तुर्वीति एवं वय्य के लिए मार्ग बनाया तथा जल में डूबे एवं तल में वर्तमान अंधे-पंगु परावृज का उद्धार करके कीर्ति प्राप्त की. तुम प्रशंसा के योग्य हो. (१२)

EN English Translation

O Indra! You have made a path for turvity and age to easily reach across the flowing water and attained fame by saving the present blind-crippled paravrija in the water and in the bottom. (12)

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