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2.14.10
अध्व॑र्यवः॒ पय॒सोध॒र्यथा॒ गोः सोमे॑भिरीं पृणता भो॒जमिन्द्र॑म् । वेदा॒हम॑स्य॒ निभृ॑तं म ए॒तद्दित्स॑न्तं॒ भूयो॑ यज॒तश्चि॑केत ॥ (१०)
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ऋग्वेद मन्त्र 2.14.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अध्वर्युजनो! जिस प्रकार गाय का थन दूध से भरा रहता है, उसी प्रकार इन फलदाता इंद्र को सोमरस देने वाले यजमान को भली प्रकार जानते हैं. (१०)
EN English Translation
O adhwaryujano! Just as the cow's trunk is full of milk, so these fruit givers know very well the host who gives Somras to Indra. (10)