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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 17 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 3

2.17.3

Mantra ID: 2.17.3

अधा॑कृणोः प्रथ॒मं वी॒र्यं॑ म॒हद्यद॒स्याग्रे॒ ब्रह्म॑णा॒ शुष्म॒मैर॑यः । र॒थे॒ष्ठेन॒ हर्य॑श्वेन॒ विच्यु॑ताः॒ प्र जी॒रयः॑ सिस्रते स॒ध्र्य१॒॑क्पृथ॑क् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.17.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने स्तुतियों द्वारा प्रसन्न होकर अपना शत्रुनाशक बल उत्पन्न किया है. इस प्रकार तुमने अपनी मुख्य शक्तियों का प्रदर्शन किया है. हरि नामक घोड़ों से युक्त रथ में बैठे हुए तुमने कुछ शत्रुओं को दल बनाकर और कुछ को अलग-अलग भागने पर विवश कर दिया है. (३)

EN English Translation

O Indra! You have created your own anti-hostile force by being pleased with the praises. Thus you have demonstrated your main strengths. Sitting in a chariot with horses called Hari, you have made some enemies a party and forced some to flee separately. (3)

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