Popular:
ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 18 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 1

2.18.1

Mantra ID: 2.18.1

प्रा॒ता रथो॒ नवो॑ योजि॒ सस्नि॒श्चतु॑र्युगस्त्रिक॒शः स॒प्तर॑श्मिः । दशा॑रित्रो मनु॒ष्यः॑ स्व॒र्षाः स इ॒ष्टिभि॑र्म॒तिभी॒ रंह्यो॑ भूत् ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 2.18.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तुतियुक्त एवं शुद्ध यज्ञ हम लोगों ने प्रातःकाल आरंभ किया है. चार पत्थरों, तीन स्वरों, सात छंदों तथा दस पात्रों वाला यह यज्ञ मानवों का हितकारक एवं स्वर्ग देने वाला है वह मनोहर स्तुतियों एवं हवनों द्वारा प्रसिद्ध होगा. (१)

EN English Translation

We have started a praiseful and pure yajna in the morning. This yajna with four stones, three vowels, seven verses and ten characters is beneficial and heaven-giving to human beings, it will be famous with beautiful praises and havans. (1)

卐 HinduText AI