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2.19.5
स सु॑न्व॒त इन्द्रः॒ सूर्य॒मा दे॒वो रि॑ण॒ङ्मर्त्या॑य स्त॒वान् । आ यद्र॒यिं गु॒हद॑वद्यमस्मै॒ भर॒दंशं॒ नैत॑शो दश॒स्यन् ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 2.19.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
स्तुति करने पर इंद्र ने सोम निचोड़ने वाले एतश नामक व्यक्ति के लिए सूर्य को प्रकाशित किया था. जिस प्रकार पिता अपना भाग पुत्र को देता है, उसी प्रकार एतश ने इंद्र को गुप्त एवं अमूल्य सोमरूपी धन दिया था. (५)
EN English Translation
On praising, Indra had illuminated the sun for a man named Etash, who squeezed the soma. Just as the father gives his share to the son, so Etash gave Indra the secret and priceless Somarupi wealth. (5)