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2.20.3
स नो॒ युवेन्द्रो॑ जो॒हूत्रः॒ सखा॑ शि॒वो न॒राम॑स्तु पा॒ता । यः शंस॑न्तं॒ यः श॑शमा॒नमू॒ती पच॑न्तं च स्तु॒वन्तं॑ च प्र॒णेष॑त् ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 2.20.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
युवा, आह्वान करने योग्य, मित्रलुल्य एवं सुखकारक इंद्र हम यज्ञकर्तताओं की रक्षा करें. इद्र स्तुति बोलने वाले, हव्य पकाने वाले, स्तुतिरचना करने वाले एवं यज्ञक्रियाओं को पूर्ण करने वाले व्यक्तियों की रक्षा करके इनका यज्ञ पूर्ण करते हैं. (३)
EN English Translation
Young, invoicable, friendly and pleasing Indra, we protect the yajnakartas. Idra completes the yajna by protecting those who speak praise, cook the havan, those who make praises and complete the yajna kriyas. (3)