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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 23 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 13

2.23.13

Mantra ID: 2.23.13

भरे॑षु॒ हव्यो॒ नम॑सोप॒सद्यो॒ गन्ता॒ वाजे॑षु॒ सनि॑ता॒ धनं॑धनम् । विश्वा॒ इद॒र्यो अ॑भिदि॒प्स्वो॒३॒॑ मृधो॒ बृह॒स्पति॒र्वि व॑वर्हा॒ रथा॑ँ इव ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.23.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति युद्धकाल में आह्वान करने एवं नमस्कार सहित पूजा करने योग्य हैं. वे संग्राम में भक्त की सहायता के लिए जाते तथा सब प्रकार का धन देते हैं. जिस प्रकार युद्ध में शत्रुओं के रथों को नष्ट कर दिया जाता है, उसी प्रकार बृहस्पति विजय की इच्छुक शन्रु सेनाओं को न्टभ्रष्ट कर देते हैं. (१३)

EN English Translation

Jupiter is worthy of worship in the wartime with a call and salutations. They go to the aid of the devotee in the struggle and give all kinds of money. Just as the chariots of enemies are destroyed in war, jupiter misleads the shanru armies who want victory. (13)

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