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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 23 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 15

2.23.15

Mantra ID: 2.23.15

बृह॑स्पते॒ अति॒ यद॒र्यो अर्हा॑द्द्यु॒मद्वि॒भाति॒ क्रतु॑म॒ज्जने॑षु । यद्दी॒दय॒च्छव॑स ऋतप्रजात॒ तद॒स्मासु॒ द्रवि॑णं धेहि चि॒त्रम् ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.23.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यज्ञ से उत्पन्न बृहस्पति! हमें श्रेष्ठ लोगों द्वारा पूज्य, दीप्त एवं ज्ञान से युक्त, यज्ञकर्तताओं में सुशोभित तेज तथा दीप्तियुक्त विचित्र धन प्रदान करो. (१५)

EN English Translation

O Jupiter born of the yajna! Give us the strange riches of bright and radiant adorned in the sacrificial acts, revered, illuminated and enlightened by the best of people. (15)

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