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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 23 • Mantra / Rik 18

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 18

2.23.18

Mantra ID: 2.23.18

तव॑ श्रि॒ये व्य॑जिहीत॒ पर्व॑तो॒ गवां॑ गो॒त्रमु॒दसृ॑जो॒ यद॑ङ्गिरः । इन्द्रे॑ण यु॒जा तम॑सा॒ परी॑वृतं॒ बृह॑स्पते॒ निर॒पामौ॑ब्जो अर्ण॒वम् ॥ (१८)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.23.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अंगिरावंशोत्पन्न बृहस्पति! गायों को छिपाने वाला पर्वत तुम्हारे कल्याण के लिए खुल गया और गाएं बाहर आ गई. उस समय तुमने इंद्र की सहायता से वृत्र द्वारा रोकी गई जलधारा को नीचे की ओर बहाया था. (१८)

EN English Translation

O Angiravansh-born Jupiter! The mountain hiding the cows opened up for your welfare and the cows came out. At that time, with the help of Indra, you had flowed the stream stopped by the vritra downwards. (18)

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