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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 28 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 4

2.28.4

Mantra ID: 2.28.4

प्र सी॑मादि॒त्यो अ॑सृजद्विध॒र्ताँ ऋ॒तं सिन्ध॑वो॒ वरु॑णस्य यन्ति । न श्रा॑म्यन्ति॒ न वि मु॑चन्त्ये॒ते वयो॒ न प॑प्तू रघु॒या परि॑ज्मन् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.28.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

विश्वधारक एवं अदितिपुत्र वरुण ने जल बनाया है. उन्हीं के महत्त्व से नदियां बहती हैं. नदियां न कभी विश्राम करती हैं और न पीछे लोटती हैं. ये शीघ्रगामिनी नदियां पक्षियों के समान वेग से धरती पर बहती हैं. (४)

EN English Translation

Varuna, the world-holder and the son of Aditi, has made water. The rivers flow from their importance. Rivers never rest or retreat. These early-lived rivers flow on the earth at the same speed as birds. (4)

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