Popular:
ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 3 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 3 • ऋचा / मन्त्र 5

2.3.5

Mantra ID: 2.3.5

वि श्र॑यन्तामुर्वि॒या हू॒यमा॑ना॒ द्वारो॑ दे॒वीः सु॑प्राय॒णा नमो॑भिः । व्यच॑स्वती॒र्वि प्र॑थन्तामजु॒र्या वर्णं॑ पुना॒ना य॒शसं॑ सु॒वीर॑म् ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 2.3.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रकाशित-द्वार रूप, विस्तृत मनुष्यों द्वारा नमस्कारयुक्त स्तुतियों से हवन किए जाते हुए तथा लोगों द्वारा सरलता से प्राप्त करने योग्य अग्नि! तुम खुल जाओ. तुम व्यापक, अविनाशी तथा यजमान के लिए शोभन पुत्र वाला रूप धारण करते हुए विशेष रूप से प्रसिद्ध बनो. (५)

EN English Translation

O revelation-door form, a agni that is performed by a wide variety of men with salutations and a agni easily attainable by the people! You open up. You become especially famous, taking the form of a son of broad, indestructible and adorned with a son of hosthood. (5)

卐 HinduText AI