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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 30 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 7

2.30.7

Mantra ID: 2.30.7

न मा॑ तम॒न्न श्र॑म॒न्नोत त॑न्द्र॒न्न वो॑चाम॒ मा सु॑नो॒तेति॒ सोम॑म् । यो मे॑ पृ॒णाद्यो दद॒द्यो नि॒बोधा॒द्यो मा॑ सु॒न्वन्त॒मुप॒ गोभि॒राय॑त् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.30.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र मुझे न कष्ट दें, न थकावें, न आलसी बनावें और न हमसे यह कहें कि सोमाभिषव मत करो. वे मेरी इच्छाओं को पूर्ण करते हुए, दान करते हुए, हमारे यज्ञ को जानते हुए एवं गायों को साथ लेते हुए सोमरस निचोड़ने वाले के पास जावें. (७)

EN English Translation

Indra should not trouble me, nor be tired, nor let alone, nor tell us not to do somabhishava. Let them go to the somras squeezer, fulfilling my wishes, donating, knowing our yajna, and taking the cows along. (7)

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