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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 4 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 4 • ऋचा / मन्त्र 8

2.4.8

Mantra ID: 2.4.8

नू ते॒ पूर्व॒स्याव॑सो॒ अधी॑तौ तृ॒तीये॑ वि॒दथे॒ मन्म॑ शंसि । अ॒स्मे अ॑ग्ने सं॒यद्वी॑रं बृ॒हन्तं॑ क्षु॒मन्तं॒ वाजं॑ स्वप॒त्यं र॒यिं दाः॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.4.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुमने पहले सवन में हमारी जो रक्षा की थी, उसे स्मरण करके हम तीसरे सवन में मनोहर स्तुतियां बोल रहे हैं. हे अग्नि! तुम हमें महान्‌ वीरों, विशाल कीर्ति एवं सुंदर संतान से युक्त धन दो. (८)

EN English Translation

O agni! By remembering what you protected us in the first suan, we are speaking beautiful praises in the third suvan. O agni! You give us wealth with great heroes, great fame and beautiful children. (8)

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