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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 5 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 5 • ऋचा / मन्त्र 7

2.5.7

Mantra ID: 2.5.7

स्वः स्वाय॒ धाय॑से कृणु॒तामृ॒त्विगृ॒त्विज॑म् । स्तोमं॑ य॒ज्ञं चादरं॑ व॒नेमा॑ ररि॒मा व॒यम् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.5.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ऋत्विज्‌ रूप अग्नि अपना कर्म समझकर ऋत्विज्‌ का काम करते हैं. हम भी अग्नि की ही कृपा से स्तुतियां, यज्ञ और हव्य पर्याप्त मात्रा में देते हैं. (७)

EN English Translation

The ritvikritis form agni understands its karma and does the work of the ritvij. We also give enough praises, yagnas and havans by the grace of agni. (7)

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