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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 5 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 5 • ऋचा / मन्त्र 8

2.5.8

Mantra ID: 2.5.8

यथा॑ वि॒द्वाँ अरं॒ कर॒द्विश्वे॑भ्यो यज॒तेभ्यः॑ । अ॒यम॑ग्ने॒ त्वे अपि॒ यं य॒ज्ञं च॑कृ॒मा व॒यम् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.5.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! ऐसी कृपा करो कि तुम्हारा महत्त्व जानने वाला यजमान सभी देवों को प्रसन्न कर सके. हे अग्नि! हम जिस यज्ञ को करेंगे, वह तुम्हारा ही होगा. (८)

EN English Translation

O agni! Please be kind that the host who knows your importance can please all the gods. O agni! The yajna we will perform will be yours. (8)

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