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2.8.2
यः सु॑नी॒थो द॑दा॒शुषे॑ऽजु॒र्यो ज॒रय॑न्न॒रिम् । चारु॑प्रतीक॒ आहु॑तः ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 2.8.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सुंदर नयनों वाले, जरारहित एवं शोभन-गति वाले अग्नि हव्यदाता यजमान के शत्रुओं को नष्ट करने के लिए बुलाए गए हैं. (२)
EN English Translation
Beautiful, unruly and dormant agni-speeders have been called to destroy the enemies of the host. (2)