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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 30 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 6

3.30.6

Mantra ID: 3.30.6

प्र सू त॑ इन्द्र प्र॒वता॒ हरि॑भ्यां॒ प्र ते॒ वज्रः॑ प्रमृ॒णन्ने॑तु॒ शत्रू॑न् । ज॒हि प्र॑ती॒चो अ॑नू॒चः परा॑चो॒ विश्वं॑ स॒त्यं कृ॑णुहि वि॒ष्टम॑स्तु ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.30.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारा अश्वयुक्त रथ शत्रुओं की ओर उत्तम मार्ग से चले एवं तुम्हारा वज्र शत्रुओं को मारता हुआ आए. तुम सामने आने वाले, पीछे आने वाले तथा भागने वाले शत्रुओं को मारो. तुम संसार को यज्ञपूर्ण करने की शक्ति दो. (६)

EN English Translation

O Indra! Your horse-drawn chariot should walk in the best way towards the enemies, and your thunderbolt came to kill the enemies. You kill the enemies who come in front, those who follow, and the fleeing enemies. Give the power to make the world miserable. (6)

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