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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 39 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 1

3.39.1

Mantra ID: 3.39.1

इन्द्रं॑ म॒तिर्हृ॒द आ व॒च्यमा॒नाच्छा॒ पतिं॒ स्तोम॑तष्टा जिगाति । या जागृ॑विर्वि॒दथे॑ श॒स्यमा॒नेन्द्र॒ यत्ते॒ जाय॑ते वि॒द्धि तस्य॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.39.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जगत्‌ के स्वामी इंद्र! हृदय से उदभूत एवं स्तोताओं द्वारा निर्मित स्तुतियां तुम्हारे पास जावें. यज्ञ में मेरी स्तुति तुम्हारे जागरण का कारण बनती है, उसे जानो. (१)

EN English Translation

O Lord of the world, Indra! May the praises that arise from the heart and made by the psalms go to you. My praise in the yajna causes your awakening, know him. (1)

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